ड्राइंग एण्ड पेंटिंग ( चित्रकला ) विभाग का उद्देश्य शिक्षा को जीवन कौशल, स्वावलंबन और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना है। विभाग की नींव वर्ष 2024 में स्नातक (UG) स्तर पर रखी गई। इसमें माननीय राजकुमारी रत्ना सिंह जी के दूरदर्शी और प्रेरक प्रयासों का विशेष योगदान रहा है। मूल मंत्र: शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे जीवन कौशल, स्वावलंबन और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ एकीकृत करना विभाग का प्राथमिक लक्ष्य है। शिक्षण पद्धति की विशेषताएं (त्रिवेणी संगम) विभाग ने शिक्षा को तीन मुख्य धाराओं में विभाजित किया है, जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को निखारती हैं: ज्ञान: कला के सैद्धांतिक और ऐतिहासिक पहलुओं की गहरी समझ। कौशल: व्यावहारिक प्रशिक्षण और कलात्मक बारीकियों में दक्षता। समाज: कला के माध्यम से सामाजिक चेतना और सामुदायिक जुड़ाव। नवाचार और अधिगम (Learning) प्रोजेक्ट आधारित अधिगम (Project Based Learning): स्नातक स्तर पर रटने की पद्धति के बजाय विद्यार्थियों को वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर दिया जाता है, जिससे उनकी रचनात्मक सोच विकसित होती है। सामुदायिक सहकारिता: पाठ्यचर्या को समाज की जरूरतों और सहयोग से जोड़ा गया है, जिससे कला केवल कैनवास तक सीमित न रहकर जनमानस का हिस्सा बनती है। भविष्य का लक्ष्य: आत्मनिर्भरता और संवेदनशीलता आज यह विभाग एक ऐसी इकाई के रूप में उभरा है जहाँ: विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनने के गुण सीखते हैं (स्वरोजगार और उद्यमिता)। कला के माध्यम से वे एक संवेदनशील मनुष्य बनते हैं। समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने वाले एक उत्तरदायी नागरिक के रूप में तैयार होते हैं। यह स्पष्ट है कि कालाकांकर जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परिवेश में यह विभाग आने वाले समय में कला और शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।